
भीमताल। किसी भी योजना को लागू करना जितना आसान है, उसे व्यवहारिक रूप देना उतना ही कठिन। इसलिए पब्लिक को फायदा पहुंचाने से पहले ही सरकारी योजनाएं दम तोड़ जाती हैं और फिर भी लोग इस सिस्टम पर भरोसा रखते हैं। बच्चों का मनोबल बढ़ाने के मकसद से जो दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना सरकार ने लागू की, उसके 1100 आवेदन समाज कल्याण आफिस में धूल खा रहे हैं। दो साल से समाज कल्याण ने छात्रवृत्ति देने के लिए जितना पैसा सरकार से मांगा, उसका आधा भी नहीं मिला।
आवेदन डंप हैं, बच्चों और उनके अभिभावक आए दिन दफ्तर के चक्कर काटते हैं, लेकिन छात्रवृत्ति है कि मिलती ही नहीं। प्रदेश सरकार कक्षा एक से दस तक के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति उपलब्ध कराती है। जबकि 11वीं कक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में अध्ययनरत और व्यवसायिक शिक्षा लेने वाले पिछड़ी जाति के बच्चों को पिछड़ी जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति दी जाती है। दोनों छात्रवृत्तियां समाज कल्याण विभाग के माध्यम से स्कूलों को बांटने का प्रावधान है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो 2012-13 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए शासन से 3 करोड़ 50 लाख रुपये की मांग की गई थी लेकिन मिले सिर्फ 71 लाख 26 हजार रुपये। वर्ष 2013-14 में 4 करोड़ 16 लाख 77 हजार की मांग भेजी गई तो बदले में 39 लाख 40 हजार रुपये ही प्राप्त हुए। अधिकारियों के मुताबिक छात्रवृत्ति पहले सरकारी कालेज, संस्थानों के छात्र-छात्राओं को वितरित की जाती है और उसके बाद निजी शिक्षण संस्थान के प्रतिभागियों को। ऐसे में सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे लगभग विद्यार्थी सरकार की इस व्यवस्था से परेशान हैं।
—कोट—
दशमोत्तर छात्रवृत्ति के वितरण के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। जैसे ही इस मद में बजट उपलब्ध होगा, छात्रवृत्ति बांट दी जाएगी। -सरोज राणा, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल।
